Kanpur News: भीख मांगकर दिव्यांग महिला ने पुलिस को दिए थे रुपये, दोषी पुलिस कर्मियों को मिली क्लीनचिट

सुमित शर्मा, कानपुर
कानपुर पुलिस अपने कारनामों को लेकर सुर्खियों में बनी रहती है। एक चौकी इंजार्च और विवेचना अधिकारी की करतूत ने पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने का काम किया था। अब दोषी पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी गई है। पुलिस ने एक दिव्यांग महिला से उसकी नाबालिग बेटी को ढूंढने के लिए गाड़ी में डीजल डलवाने के नाम पर 12 हजार रुपये वसूले थे। दिव्यांग ने भीख मांगकर पुलिस को रुपये दिए थे।

चकेरी थाना क्षेत्र स्थित सनिगवां में रहने वाली दिव्यांग बुजुर्ग महिला भीख मांग कर गुजर-बसर करती थी। दिव्यांग महिला की 17 वर्षीय बेटी बीते 07 जनवरी को लापता हो गई थी। दिव्यांग महिला ने बीते 09 जनवरी को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बेटी को ढूंढने के लिए पुलिस ने गाड़ी और उसमें डीजल भरवाने के लिए दिव्यांग महिला से 15 हजार रुपयों की मांग की थी। दिव्यांग महिला ने भीख मांग कर पुलिस को 12 हजार रुपये डीजल भरवाने के लिए दिए थे। इसके बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। दिव्यांग ने तत्कालीन डीआईजी से रो-रो कर गुहार लगाई थी। डीआईजी ने चौकी इंचार्ज और विवेचना अधिकारी को सस्पेंड कर दिया था।

सीओ सदर की जांच में मिली क्लीन चिट
दिव्यांग महिला से 12 हजार रुपये की वसूली करने की जांच सीओ सदर को सौंपी गई थी। सीओ सदर ने अपनी जांच में तत्कालीन चौकी इंचार्ज राजपाल सिंह और विवेचक अरुण कुमार को क्लीन चिट दे दी है। उनकी जांच के अनुसार, महिला ने दारोगा को नहीं, बल्कि अपने बेटे को रुपये दिए थे। एसीपी आकाश कुलहरि का कहना है कि जांच रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी, जरूरत पड़ी तो दोबारा जांच कराई जाएगी।

तत्कालीन डीआईजी के अल्टीमेटम के बाद बरामद हुई थी नाबालिग
तत्कालीन डीआईजी डॉक्टर प्रीतिंदर सिंह ने चकेरी पुलिस को 24 घंटे भीतर नाबालिग को बरामद करने का अल्टीमेटम दिया था। चकेरी पुलिस ने बीते 4 फरवरी को दिव्यांग महिला की नाबालिग बेटी को नौबस्ता से एक ठाकुर नाम के युवक के घर से बरामद किया था। आरोपी युवक को पॉक्सो और रेप की धाराओं में जेल भेजा गया है।

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