EXPLAINER: क्या होती है आइडियल पिच? चेन्नई की पिच को आप कितने नंबर देंगे?– News18 Hindi

(आनंदब्रत शुक्ला)

चेन्नई. आखिर टेस्ट मैच के लिए आइडियल पिच (Ideal Test Pitch) कैसी होती है? यह एक ऐसा सवाल है, जिस पर पिछले चार दिन में भारत से लेकर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया तक के क्रिकेटप्रेमियों में सबसे ज्यादा बहस हुई. भारत के प्रशंसक इससे ज्यादा परेशान नजर नहीं आए, लेकिन इंग्लिश टीम के फैंस इसे खराब कहते रहे. हमेशा की तरह पूर्व क्रिकेटर अपने-अपने देश का साथ देते रहे. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर भी पिच की इस बहस में शामिल हुए और उन्होंने इसके बहाने अपने परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों, यानी इंग्लिश क्रिकेटरों पर निशाना साधा. यह बहस शायद ही सार्थक नतीजे तक पहुंच पाई. इसलिए न्यूज18 हिंदी ने ‘आइडियल पिच (Ideal Pitch)’ पर यह एक्सप्लेनर किया, जिससे हम इस बारे में किसी नतीजे तक पहुंच पाएं.

आइडियल पिच की बहस भारत बनाम इंग्लैंड (India vs England) टेस्ट मैच से शुरू हुई. वैसे तो इस बहस ने दूसरे टेस्ट मैच में तेजी पकड़़ी, लेकिन इसकी शुरुआत पहले टेस्ट मैच के बाद ही हो गई थी, जब जोफ्रा आर्चर ने इसे घटिया और बीसीसीआई के पूर्व पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह ने बेस्ट बताया. इसलिए हम पहले इन दोनों टेस्ट मैच पर एक नजर डाल लेते हैं.

पहला टेस्ट इंग्लैंड के नाम: पहला टेस्ट 5 फरवरी से खेला गया. इंग्लैंड ने इसे 227 रन से जीता. इस मैच में एक शतक और सात अर्धशतक लगे. एक दोहरा शतक भी लगा. इंग्लैंड को 5वें दिन जीत मिली. इंग्लैंड ने पहली पारी में 500 से अधिक और भारत ने 300 से ज्यादा रन बनाए. स्पिनरों को 24 और तेज गेंदबाजों को 16 विकेट मिले.

दूसरे टेस्ट में भारत की वापसी: भारत ने यह मैच 317 रन से जीता. चार दिन चले मैच में दो शतक और तीन अर्धशतक लगे. भारत ने 329 और 286 का स्कोर बनाया. इंग्लैंड 134 और 164 पर ढेर हो गया. स्पिनरों ने 32 और तेज गेंदबाजों ने 7 विकेट लिए.

पिच पर फूटा वॉन और आर्चर का गुस्सा

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन (Michael Vaughan) ने दूसरे टेस्ट की पिच को लेकर ट्वीट किया, ‘चेपॉक की पिच 5 दिन के टेस्ट के लिए तैयार नहीं की गई है. ऐसा कभी नहीं होता है कि पहले दिन के पहले दो सेशन में गेंद इतनी स्पिन हो.’ भारत के पूर्व क्रिकेटरों ने उन्हें इसका जवाब दिया ही, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न ने भी आइना दिखाया. उन्होंने कहा कि पिच दोनों टीमों के लिए एक जैसी है. इंग्लैंड ने पहली पारी में खराब गेंदबाजी की और भारत ने इसका फायदा उठाया. रोहित शर्मा (161 रन), अजिंक्य रहाणे (67 रन) और ऋषभ पंत (58 रन) ने दिखाया कि कैसे बल्लेबाजी की जाती है.’ इससे पहले इंग्लिश टीम के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर (Jofra Archer) ने पहला मैच जीतने के बाद कहा था कि यह पिच खेलने लायक नहीं थी.

पेसर को मदद करने वाली पिच पर बात क्यों नहीं होती?

भारत के पूर्व कप्तान क्रिकेटर सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने दूसरे मैच की पिच का समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘इंग्लैंड में तेज गेंदबाजों को मदद करने वाली पिच होती हैं, लेकिन कोई इसकी चर्चा नहीं करता. हमेशा भारतीय पिचों की ही बात की जाती है. जब भी गेंद स्पिन लेनी शुरू करती है, तभी लोगों को परेशानी होती है. आखिर अगर पिच खेलने लायक नहीं होती, तो कोई भी टीम 339 रन का स्कोर नहीं बना पाती.’

आखिर कैसी हो आइडियल टेस्ट पिच

इस सवाल के जवाब में हमें क्रिकेट और खासकर टेस्ट मैच की मूल बातों को समझना है. टेस्ट मैच पांच दिन चलता है और एक टीम में मुख्यत: दो तरह के स्पेशलिस्ट खिलाड़ी होते हैं. बल्लेबाज और गेंदबाज. गेंदबाजी की भी दो विधाएं हैं, जो बिलकुल अलग हैं. तेज और स्पिन गेंदबाजी. आइडियल पिच वह है, जिस पर पहले से आखिरी दिन तक बल्लेबाज बैटिंग कर सके और वह अपनी गलती या गेंदबाजी के हुनर की वजह से आउट हो, ना कि पिच की बदमिजाजी के कारण. इसी तरह पिच पर गेंदबाजों के लिए हर दिन ऐसी उछाल या टर्न रहे कि वह अगर हुनरमंद है और अच्छी लाइन-लेंथ पर बॉलिंग कर रहा है तो विकेट ले सके. ऐसी पिचें अच्छी नहीं कही जा सकतीं जिन पर उछाल या टर्न ना हो या इतनी अधिक उछाल या टर्न हो कि उसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाए.

किस देश की पिच हैं आइडियल

इस सवाल के जवाब में कोई एक नाम लेना सही नहीं होगा. लेकिन अगर हम पिछले 5 साल के मैचों को देखें तो ऑस्ट्रेलिया की पिचें आइडियल के करीब नजर आती हैं. याद करिए हाल ही में खेली गई भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज. भारतीय टीम ने यह सीरीज 2-1 से जीती. हालांकि टीम इंडिया पहले टेस्ट की दूसरी पारी में वह 36 रन पर ढेर हो गई. तब भी किसी ने यह नहीं कहा कि इसमें पिच का कोई दोष था. इसी भारतीय टीम ने तीसरे और चौथे टेस्ट मैच में पांचवें दिन तकरीबन सारे ओवर खेले और आउट नहीं हुई. ऑस्ट्रेलिया की पिचें अपनी उछाल और तेजी के लिए मशहूर हैं. लेकिन इन पर इतनी तेजी कभी नहीं रही कि बैटिंग करना नामुमकिन हो जाए. इन तेज पिचों पर ही स्पिनरों ने भी खूब विकेट निकाले. भारत ने ब्रिस्बेन में आखिरी दिन 325 रन बनाकर मैच भी जीता. यानी ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर हर दिन बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के लिए कुछ ना कुछ अच्छा था.

चेन्नई की पिच खराब नहीं, ‘खूबसूरत’ है

चेन्नई में पहला टेस्ट पांच दिन चला. शतक लगे और तेज गेंदबाजों और स्पिनरों ने विकेट झटके. चूंकि भारत की पिचें मूलत: स्पिनरों की मददगार होती हैं. वह हर दिन के साथ धीमी होती हैं और स्पिनरों को मदद बढ़ती जाती है. ऐसा ही इस बार भी हुआ. चेपॉक की पिचों पर ऐसा कोई भूत नहीं था, जिससे अंग्रेज कांप उठे. यह तो उनका आत्मबल था, जो भारत के सामने हिल गया था. दूसरी भारत की ताकत, जिसका अंदाजा इंग्लैंड को बखूबी था और इसी डर से उस पर पहले दिन से नकारात्मक सोच हावी हो गई थी. जब इसी इंग्लैंड ने जनवरी में श्रीलंका को स्पिन ट्रैक पर हराया, तब अंग्रेजों को पिच बुरी नहीं लगी थी.

5 में से 3-4 अंक की हकदार है पिच

चेन्नई की जिन पिचों पर पिछले दो टेस्ट मैच खेले गए हैं, वे 5 में से 3-4 अंकों की हकदार हैं. वजह- दोनों मैच में रिजल्ट आए. दोनों मैचों में शतक लगे. दोनों मैचों में स्पिनर और तेज गेंदबाजों ने विकेट लिए. ऐसे में चेन्नई की पिच को खराब नहीं कहा जा सकता है. हां, ऑस्ट्रेलिया को परफेक्ट पिच के हिसाब से 4-5 अंक दिए जा सकते हैं. और खुद इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की पिचों का बुरा हाल है.

न्यूजीलैंड में 89% विकेट तेज गेंदबाजों को मिले

टीम इंडिया ने फरवरी-मार्च 2020 में न्यूजीलैंड में दो टेस्ट मैच खेले थे. दोनों मैच चार-चार दिन में खत्म हो गए. टीम इंडिया चार में से एक भी पारी में 250 रन नहीं बना सकी. दो मैच में कुल 63 विकेट गिरे. इनमें से 56 विकेट तेज गेंदबाजों को मिले. यानी 89 फीसदी विकेट. तब किसी दिग्गज ने पिच से तेज गेंदबाजों को मदद मिलने पर आपत्ति नहीं जताई. तब तो लोग भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक में कमी ढूंढ़ते रहे.

इंग्लैंड में भी तेज गेंदबाजों ने 83 फीसदी झटके

कोरोना के बीच 8 जून से पहली टेस्ट सीरीज इंग्लैंड में शुरू हुई. इंग्लैंड ने विंडीज के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम की. मेहमान टीम छह पारियों में सिर्फ एक बार 300 रन बना सकी. सीरीज में कुल 100 विकेट गिरे. इनमें से 83 विकेट तेज गेंदबाजों को मिले. यानी 83 फीसदी विकेट तेज गेंदबाजों को मिले. तब माइकल वॉन से लेकर जोफ्रा आर्चर तक को यह बात नजर नहीं आई कि ये पिचें एकतरफा स्वभाव की हैं.

हम खराब खेलते हैं तो तकनीक पर सवाल उठाए जाते हैं

टीम इंडिया जब भी ‘सेना’ देशों ( दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) में टेस्ट हारती है तो हमारी तकनीक पर सवाल उठाए जाते हैं. तब कोई भी पिच के बारे में बात नहीं करता. जबकि हकीकत यह है कि ये टीमें अपने देश के खिलाड़ियों को पसंद आने वाली तेज पिचें बनाते हैं. और ऐसा करना गुनाह भी नहीं है. हर मेजबान को इतनी छूट तो दी ही जाती है कि वह पिच का फायदा उठाने के लिए इसे थोड़ी-बहुत अपने हिसाब से रखे. हां, यह छूट इतनी नहीं हो सकती कि खेल या खिलाड़ियों की सेहत को नुकसान पहुंचा दे. भारत ने भी स्पिन ट्रैक बनाकर इसी अधिकार का इस्तेमाल किया है. बात बस इतनी सी है, जिसने अंग्रेजों का हाजमा खराब कर दिया है.

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