Covid-19 Oxygen : बोकारो और नोएडा के ‘जय-वीरु’, 1400 किमी का सफर तय कर ऑक्सिजन लाया जिगरी यार

हाइलाइट्स:

  • दुनिया में सबकुछ उसने कमाया, जिसने कमाई दोस्ती
  • जानिए बोकारो नोएडा के जय-वीरू की कहानी
  • कार में ऑक्सिजन लेकर बोकारो से नोएडा पहुंच गए देवेंद्र
  • वक्त पर जिंदगी की सांसें देकर बचा ली कोरोना पीड़ित दोस्त की रंजन की जान

बोकारो:
दौलत कमाई, शोहरत कमाया… इज्जत कमाई कुछ न कमाया। दुनिया में उसने सबकुछ कमाया, जिसने कमाई दोस्ती… जिंदगी का नाम दोस्ती… दोस्ती का नाम जिंदगी। ये सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि जिंदगी का सबसे खूबसूरत रिश्ता है। शायद आपकी जीवन में भी ऐसा एक दोस्त होगा जिसे आप जिगरी या लंगोटिया भी कहते होंगे। कोरोना काल में कुछ ऐसी ही कहानी है बोकारो और नोएडा के ‘जय-वीरू’ की।

1400 किमी का सफर तक जिगरी के लिए ले आया ऑक्सिजन
बोकारो में रहने वाले टीचर देवेंद्र और नोएडा में रहनेवाले रंजन दोस्त हैं। दोस्ती ऐसी कि एक दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार। देश में कोरोना ने जब कहर बरपा रखा है तो उसकी चपेट में नोएडा में रहनेवाले रंजन भी आ गए। उनका ऑक्सिजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था, लेकिन ऑक्सिजन की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। उधर डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि मरीज की जान बचाने के लिए ऑक्सिजन की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

आजकर इंटरनेट के जमाने में कोई बात कहां कहीं रुकती है। ऐसे में रंजन के दोस्त देवेंद्र तक ये खबर आ गई। नोएडा में तो ऑक्सिजन नहीं था लेकिन बोकारो में रंजन के दोस्त देवेंद्र ने ऑक्सिजन का जुगाड़ कर लिया। लेकिन सिलेंडर का नोएडा पहुंचना जरुरी था। दोस्त की जान बचाने के लिए बोकारो से 1400 किलोमीटर का सफर कार तय कर देवेंद्र जिंदगी की सांसें ले आए।
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दरअसल बोकारो में रहने वाले देवेंद्र को दोस्त की जान के खतरे में होने की बात पता चली तो वो ऑक्सिजन सिलेंडर की व्यवस्था में जुट गए। इस दौरान उन्‍होंने बोकारो में कई प्लांट और सप्लायर का दरवाजा खटखटाया। लेकिन बिना खाली सिलेंडर के कोई भी ऑक्सिजन देने को तैयार नहीं हुआ।

हालांकि इसके बाद भी देवेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी और फिर उनकी कोशिश रंग ले आई। इसके बाद एक अन्य मित्र की मदद से बियाडा स्थित झारखंड इस्पात ऑक्सिजन प्लांट के संचालक से संपर्क कर उन्हें परेशानी बताई तो वह तैयार हो गया, लेकिन उसने ऑक्‍सीजन सिलेंडर की सिक्योरिटी मनी जमा करने की शर्त रखी। इसके बाद देवेंद्र ने जंबो सिलेंडर के लिए 10 हजार रुपये दिए, जिसमें 400 रुपये ऑक्‍सीजन की कीमत और 9600 रुपये सिलिंडर की सिक्योरिटी मनी थी।

कार में ऑक्सिजन लेकर निकल गया दोस्त
ऑक्‍सीजन सिलेंडर मिलने के बाद देवेंद्र खुद रविवार सुबह अपनी कार से नोएडा के लिए निकल पड़े और करीब 24 घंटे में पहुंच गए। हालांकि इस दौरान राज्‍यों के बॉर्डर पर उनसे पुलिस ने पूछताछ भी की, लेकिन दोस्‍त की जान बचाने की बात ने उन्‍हें रुकने नहीं दिया। पुलिस को भी ये महसूस हुआ कि इस वक्त जय-वीरू यानि देवेंद्र-रंजन के बीच फासले जितनी तेजी से कम किए जा सकें उतना अच्छा।

आखिर में देवेंद्र वक्त रहते नोएडा पहुंच गए। फौरन ऑक्सिजन देवेंद्र को लगाया गया और उनका लेवल देखा जाने लगा। दोस्त के लाए ऑक्सिजन के लगते ही रंजन की हालत अब सुधरने लगी है।
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इसी बीच जब देवेंद्र सिलेंडर लेकर दिल्ली पहुंचे तो रंजन अग्रवाल की आंखें भर आईं। इसके बाद उन्‍होंने कहा कि जब मेरे पास ऐसा दोस्त है तो कोरोना की क्या औकात जो मेरा कुछ बिगाड़ ले। रंजन के जानने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि भगवान ऐसा दोस्त सभी को दे। दूसरी तरफ बोकारो से नोएडा आने वाले देवेंद्र अब अपने दोस्त के पूरी तरह से स्वस्थ होने तक यहीं मोर्चा थामे रहना तय कर चुके हैं।

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