‘वेयरअबाउट’ के साथ कलात्मक उपलब्धि के नए स्तर पर झुम्पा लाहिड़ी

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नई, दिल्ली। विपुलता और भय, लगाव और व्यवस्था,अपने नए उपन्यास ‘व्हेयरअबाउट्स’ (पेंगुइन) के साथ, झुम्पा लाहिड़ी अपने बिषयों को सामाओं के बाहर ले तक गई। केंद्र में मौजूद महिलाएं तनाव और आंदोलन के बीच संबंध बनाए रखने की आवश्यकता और स्थायी संबंध बनाने से इनकार के बीच लहराती हैं। वह शहर जिसे वह घर कहती है, एक विश्वासपात्र के रूप में कार्य करता है, उसके घर के चारों ओर फुटपाथ, पार्क, पुल, पियाजे, गलियां, स्टोर, कॉफी बार सब होता है।

हम उसे उस पूल तक पहुंचाते हैं जिसका वह फ्ऱीक्वेंट करता है और ट्रेन स्टेशन पर है जो कभी कभी उसे उसकी मां की ओर ले जाती है, जो उसके पिता की असामयिक मृत्यु के बाद हताश एकांत में चली गई। काम पर सहकर्मियों के साथ वह कभी भी सेफ महसूस नहीं करती है, लेकिन एक वर्ष के आर्क में, जैसा कि एक सीजन अगले के लिए रास्ता देता है, वह परिवर्तन इंतजार कर रही है।

झुम्पा लाहिड़ी चार रचनाओं की लेखक हैं ‘इंटरप्रेटर ऑफ मैलिडीट्स’, ‘द नेमसेक’, ‘अनकॉस्टेड पृथ्वी’ और सबसे हाल ही में, ‘द लीलैंड’। झुम्पा को पुलित्जर पुरस्कार, पेन हेमिंग्वे पुरस्कार, फ्रैंक ओ’कॉनर इंटरनेशनल शॉर्ट स्टोरी अवार्ड और एक गुगेनहाइम फैलोशिप मिल चुकी है। उन्हें 2012 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स में शामिल किया गया था। (आईएएनएस)

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