फर्जी एनकाउंटर, हत्या के प्रयास-गांजा तस्करी के केस…ढाबेवाले के पैसे मांगने पर पुलिसवालों ने रची ऐसी साजिश!

हाइलाइट्स:

  • यूपी के एटा में पुलिसवालों ने एक ढाबा मालिक समेत 10 निर्दोषों पर लादे केस
  • ढाबा मालिक है पीड़ित, उसके ढाबे पर खाना खाने गए थे आरोपी पुलिसकर्मी
  • पैसे मांगने से इतना नाराज हुए कि बड़ी साजिश रच डाली, गांजा तस्करी के लगाए चार्ज
  • डीएम के आदेश पर एएसपी ने की जांच, पुलिसवालों को सस्पेंड कर होगी कार्रवाई

एटा
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक ढाबे पर खाने के पैसे मांगने पर उसके मालिक समेत 10 लोगों को झूठे मामले में फंसाने के आरोप में एक हेड कॉन्स्टेबल और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हेड कॉन्स्टेबल शैलेंद्र और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर आरोप है कि ढाबा मालिक पुष्पेंद्र यादव ने जब उनसे खाने के पैसे मांगे तो उन्होंने उसे और अन्य को झूठे मामले में फंसा दिया।

कोतवाल और दो हेड कॉन्स्टेबल ने रची साजिश

पुष्पेंद्र के छोटे भाई प्रवीण की शिकायत पर अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) राहुल कुमार की जांच के बाद FIR दर्ज की गई है। प्रवीण ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कोतवाल (देहात) इंद्रेश पाल सिंह और दो हेड कॉन्स्टेबल शैलेन्द्र और संतोष कुमार ने 10 लोगों को झूठे मामले में फंसाया है।

शराब माफिया की मदद से रचा गांजा तस्करी का जाल

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कोतवाली (देहात) इलाके में हुई एक कथित मुठभेड़ मामले में अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है और सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। एएसपी कुमार ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने स्थानीय शराब माफिया बंटू यादव की मदद ली, जिन्होंने कथित तौर पर पुलिस को अवैध शराब और ‘गांजा’ मुहैया कराया था।

डीएम के आदेश पर एएसपी ने की जांच

जिलाधिकारी के आदेश के बाद घटना की जांच कर रहे राहुल कुमार ने बताया, ‘दो दिन पहले मुझे जिलाधिकारी की ओर से इस मुठभेड़ और तस्करी की घटना की जांच करने को कहा गया। मामला काफी गंभीर है बहुत ही गहनता से जांच की जा रही है।’ कुमार ने बताया कि मंगलवार रात एफआईआर में नामजद आरोपियों और इस घटना में पुलिस को शराब उपलब्ध कराने में मदद करने वाले शराब माफिया बंटू यादव सहित अन्य के ठिकानों पर पुलिस टीम ने दबिश दी, लेकिन अभी तक पुलिस के हत्थे कोई भी आरोपी नहीं लगा है।

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कोतवाल ने दिखाई फर्जी मुठभेड़ और माल की बरामदगी

कोतवाली (देहात) पुलिस ने पहले दावा किया था कि उन्होंने चार फरवरी की शाम को जसराम गांव में ढाबे पर छापा मारा था और एक मुठभेड़ के बाद ढाबे से 10 लोगों को गिरफ्तार किया और उनके पास देसी पिस्तौल, शराब और गांजा बरामद किया था। ढाबे से गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में प्रवीण के बड़े भाई पुष्पेंद्र यादव (34), चचेरे भाई दीपक यादव (24) और आठ अन्य थे। उन पर हत्या के प्रयास, आबकारी अधिनियम की धाराओं, शस्त्र अधिनियम और एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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खाने के पैसे मांगने से नाराज, रच डाली इतनी बड़ी साजिश

शिकायत में प्रवीण ने आरोप लगाया कि चार फरवरी को उनके ढाबे पर कोतवाली (देहात) में तैनात पुलिसकर्मी शैलेंद्र यादव व संतोष यादव खाना खाने पहुंचे और वे नशे में धुत थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वहां उनके खाने का बिल 400 रुपये बना लेकिन वे खाने के पैसे नहीं दे रहे थे। इस पर वहां खाना खा रहे अन्य लोगों के कहने पर पुलिसकर्मी 100 रुपये देने लगे लेकिन पूरा पैसा मांगने पर अपशब्द कहने लगे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद दोनों में कहासुनी हो गई और उन्होंने कोतवाली फोन कर दिया जहां से दो गाड़ियों में पुलिसकर्मी और प्रभारी निरीक्षक वहां आ गए।

पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने और आगे की कार्रवाई के आदेश

प्रवीण ने आरोप लगाया, ‘पुलिसकर्मियों से पैसे मांगने पर हमारे भाई समेत होटल पर खाना खाने आए 10 लोगों को पुलिस जबरन पकड़ कर ले गई।’ आगरा के अपर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में शामिल पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करने और कानूनी कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे पूर्व एक अन्य मामले में जिलाधिकारी के छापे के दौरान थाना परिसर से पुलिस अभिरक्षा में रखी शराब की 1400 पेटियां गायब होने की रिपोर्ट भी इसी थाने में दर्ज है और इस मामले में आरोपी निरीक्षक समेत सभी पुलिसकर्मी आज तक फरार हैं।’

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