पाकिस्तान में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है बसंत पंचमी का पर्व, रात भर सजती है महफिल, बंटती हैं मिठाईयां

बुद्धि और ज्ञान की देवी सरस्वती मां को समर्पित बसंत पंचमी का पर्व देशभर में मनाया जा रहा है. जानकर हैरानी होगी कि बसंत का ये पावन पर्व भारत में ही नहीं पाकिस्तान में भी काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस त्योहार के मौके पर पाकिस्तान के बाजारों की रौनक भी देखते ही बनती है. दुकानों पर ड्रायफ्रूट्स और पीले चावल की भरमार रहती है.

घरों में पकवान बनाए जाते हैं

बसंत पंचमी के पर्व पर पाकिस्तान में बच्चे रंगीन कपड़े पहनते हैं तो वहीं बड़े-बुजुर्ग और महिलाएं पीले कपड़े पहनकर सजे-धजे नजर आते हैं .घर में स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं. यहां पीले चावल की खीर खासतौर पर बनाई जाती है. गौरतलब है कि पाकिस्तान में  बसंत पंचमी का पर्व वैसे तो धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन  खैबर पख्तूनवा प्रांत के पेशावर और पंजाब प्रांत में इस पर्व की अलग ही छटा नजर आती है. बता दें कि  1990 के दशक के दौरान  कई आतंकी घटनाओं और धार्मिक कट्टरता ने इस पर्व की रौनक पर काफी असर डाला . लेकिन वक्त के साथ अब लोग आगे बढ़ रहे हैं और आपसी सौहार्द के साथ बसंत के त्योहार की खुशियां एक दूसरे के साथ बांट रहे हैं.

पाकिस्तान में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है बसंत पंचमी का पर्व

बता दें कि पाकिस्तान का पेशावर हिंदुओं के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है. यहां हिंदू परिवारों की संख्या 70 हजार से ज्यादा है. बसंत पंचमी के त्योहार पर तो यहां जैसे खुशियां बरसने लगती है. मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है. यहां के हिंदू परिवार बसंत के उत्सव को रातभर मनाते है. इस दौरान लोग अपने मित्रों को उपहार और मिष्ठान देते हैं. वैसे कहना गलत नहीं होगा कि बसंत पंचमी का त्योहार पाकिस्तान में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक माना जाता है.

बसंत पंचमी को अंतरराष्ट्रीय उत्सव का दर्जा मिला हुआ था

बताया जाता है कि बसंत पंचमी के त्योहार में मुस्लिम परिवार भी शरीक होते हैं और नाच गाना करते हैं. कुछ साल पहले तक यहां बसंत पंचमी को अंतरराष्ट्रीय उत्सव का दर्जा मिला हुआ था. दरअसल इस दिन पूरा शहर रंगीन झंडों से सजा हुआ नजर आता था. रात में पतंगबाजी का आयोजन किया जाता था जिसे देखने के लिए विदेशों  से लोग आते थे. फाइव स्टार होटल पूरी तरह टूरिस्टों से भर जाते थे. लेकिन मांझे की वजह से हुए हादसों ने इन आयोजन पर रोक लगा दी. बता दें कि साल 2007 से सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर रोक लगा दी गई थी.

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