पाकिस्तान में बसंत पंचमी: घर-घर मेले सा नजारा, रातभर होता है जश्न, पड़ोसियों को तोहफे देते हैं; पतंगबाजी पर बैन से लोग निराश

  • Hindi News
  • International
  • A House to house Fair, An Overnight Celebration, Gifts To Neighbors; People Disappointed Due To Ban On Kite Flying

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पेशावर27 मिनट पहलेलेखक: रिफातुल्लाह उराकजई

  • कॉपी लिंक

पेशावर में मां सरस्वती का मंदिर।

  • पेशावर, लाहौर और सिंध में बसंत पंचमी बड़े त्योहारों में एक, पीले चावल की खीर खाई जाती है

बसंत पंचमी का पर्व भारत ही नहीं, पाकिस्तान में भी धूमधाम से मनाया जाता है। यही कारण है कि इन दिनों पेशावर के बाजारों में रौनक बिखरी है। लोग अपने बच्चों को नए कपड़े दिलाने और ड्रायफ्रूट्स, पीले चावल की खरीदी में मशगूल हैं। पेशावर के हिंदू नेता हारून सरब दयाल कहते हैं कि पेशावर समेत देश के अन्य हिस्सों में कई हफ्ते पहले बसंत पंचमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

बच्चे रंगीन, तो बड़े-बुजुर्ग और महिलाएं पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। लजीज व्यंजन बनाए जाते हैं। इनमें पीले चावल की खीर प्रमुख है। दरअसल, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा प्रांत के पेशावर और पंजाब प्रांत के लिए बसंत पंचमी प्रमुख पर्वों में से एक है। 1990 के दशक में बढ़ते आतंकवाद और धार्मिक कट्टरता ने इन रंगों को फीका कर दिया। हालांकि वक्त के साथ पहले जैसा सौहार्द दिखने लगा है।

पेशावर हिंदुओं के सबसे पुराने शहरों में से है। यहां 70 हजार से ज्यादा हिंदू रहते हैं। प्राचीन मंदिर भी हैं। बसंत पंचमी पर मंदिरों में खास रौनक रहती है। पेशावर के प्राचीन मंदिर के पुजारी शकील कुमार बताते हैं,‘हिंदू समुदाय पिस्ता, बादाम, काजू, मूंगफली के बॉक्स बनाते हैं। खास हक्वा मिठाई बनाते हैं और पड़ोसियों को तोहफे के रूप में देते हैं।’ पेशावर सदर के जुबैर इलाही बताते हैं कि बसंत पंचमी पर हम हिंदू मित्रों के घर जाते हैं। भोजन करते हैं और रातभर चलने वाले उत्सव में शरीक होते हैं।

इस पर्व को अंतरराष्ट्रीय उत्सव का दर्जा हासिल था

लाहौर के पत्रकार फुर्खान जन बताते हैं कि बसंत पंचमी की रात मुस्लिम परिवार भी डांस पार्टी करते हैं। कुछ साल पहले तक यहां बसंत पंचमी को अंतरराष्ट्रीय उत्सव का दर्जा था। शहर रंगीन झंडों से सजता था। रात में होने वाली पतंगबाजी देखने विदेश से लोग आते थे। शाम होते ही छतों पर सर्च लाइट लग जाती थी। पांच सितारा पैक रहते थे। हादसों की वजह से 2007 से सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा रखी है।

Dainic Bhaskar

Leave a Comment