नौकरी के नाम पर महिलाओं को भेजते थे विदेश… पहुंचने पर लगाई जाती थी बोली… यूपी की 17 और गुजरात की 1 महिला का सौदा

सुमित शर्मा, कानपुर
कानपुर की कमिश्नरेट क्राइम ब्रांच पुलिस ने मानव तस्करी करने वाले गिरोह के दो एजेंट को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के सदस्य महिलाओं और युवतियों को विदेशों में अच्छी नौकरी लगवाने का प्रलोभन देते थे। इसके बाद टूरिस्ट वीजा पर ओमान, सऊदी अरब, कतर, कुवैत में बेच दिया जाता था। जहां पर महिलाओं को बंधक बनाकर उनसे घरों में काम कराया जाता है। इसके साथ ही उनका मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। पकड़े एक आरोपियों के तार दिल्ली, मुम्ंबई, कर्नाटक की ट्रैवेल्स एजेंसियों से जुड़े हैं।

कर्नलगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले एक शख्स ने बीते 09 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मेरी पत्नी (40) को अतीकउर्र रहमान और मुज्जमिल ओमान के हॉस्पिटल में नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। टूरिस्ट वीजा पर पत्नी को बीते 5 जनवरी 2021 को ओमान भेज दिया गया था। एक दिन पत्नी का फोन आया तो उसने बताया कि मुझे यहां पर बेच दिया गया है। काफिल नाम के शख्स ने घर पर बंधकर बनाकर रखा है। यहां पर घर का काम कराने के साथ ही शारीरिक शोषण किया जा रहा है।

महिला के पति ने एजेंट अतीकउर्र रहमान और मुज्जमिल से संपर्क किया। एजेंट ने महिला के पति से वापसी की टिकट के नाम पर 22 हजार रुपये वसूल लिए। कुछ दिनों बाद महिला के पति से कागजात कंपलीट कराने के नाम पर एक लाख की मांग की जाने लगी। इसके बाद पीड़िता के पति ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।

एजेंट ने 18 महिलाओं को विदेशों में बेचा
डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि कर्नलगंज में एफआईआर के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। जिसमें पता पता चला कि अतीकउर्र रहमान और मुज्जमिल लगभग 18 महिलाओं को विदेश भेज चुके हैं। एक महिला को विदेश भेजने के एवरेज में 25 से 30 हजार रुपये मिलते हैं। इनके मुख्य एजेंट दिल्ली, मुम्बई, कर्नाटक में बैठे हैं। पकड़े गए एजेंट ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि कानपुर की 11, उन्नाव की 6 और गुजरात की एक महिला को खाड़ी के अलग-अलग देशों में भेज चुके हैं।

वीजा की अवधि समाप्त होने पर डराया जाता है
एजेंट महिलाओं और युवतियों को टूरिस्ट वीजा पर विदेश भेजते हैं। टूरिस्ट वीजा कम समयवधि कम होता है। वीजा की अवधि समाप्त होने पर महिलाओं को गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। डरी सहमी महिलाओं को बंधक बना लिया जाता है। महिलाओं से 18 से 20 घंटे काम कराया जाता है। इसके साथ ही उनका शारीरिक शोषण भी किया जाता है।

श्रीलंका मूल महिला एयरपोर्ट से करती है रिसीव
जब किसी महिला को ओमान भेजा जाता है तो एयरपोर्ट पर एक श्रीलंका मूल की महिला रिसीव करने के लिए जाती है। आयशा नाम की यह महिला आने वाली महिलाओं को अपने ऑफिस ले जाती है। जहां इनकी बोली लगाई जाती है और खरीदने वालों के हवाले कर दिया जाता है।

डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल के मुताबिक, महिलाओं को वापस इंडिया लाने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया है। इसके साथ ही मानव तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है।

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